महाभारत 13.86.19
शयानं शरगुल्मस्थं दृष्ट्वा देवाः सहर्षिभिःलेभिरे परमं हर्षं मेनिरे चासुरं हतम्
śayānaṃ śaragulmasthaṃ dṛṣṭvā devāḥ saharṣibhiḥlebhire paramaṃ harṣaṃ menire cāsuraṃ hatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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