महाभारत 13.86.2
यत्तु कारणमुत्पत्तेः सुवर्णस्येह कीर्तितम्स कथं तारकः प्राप्तो निधनं तद्ब्रवीहि मे
yattu kāraṇamutpatteḥ suvarṇasyeha kīrtitamsa kathaṃ tārakaḥ prāpto nidhanaṃ tadbravīhi me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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