महाभारत 13.86.33एवं रामाय कौरव्य वसिष्ठोऽकथयत्पुरातस्मात्सुवर्णदानाय प्रयतस्व नराधिपevaṃ rāmāya kauravya vasiṣṭho'kathayatpurātasmātsuvarṇadānāya prayatasva narādhipaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें