महाभारत 13.88.12
अपि नः स कुले जायाद्यो नो दद्यात्त्रयोदशीम्मघासु सर्पिषा युक्तं पायसं दक्षिणायने
api naḥ sa kule jāyādyo no dadyāttrayodaśīmmaghāsu sarpiṣā yuktaṃ pāyasaṃ dakṣiṇāyane
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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