महाभारत 13.89.9
आदिपत्यं व्रजेन्मर्त्यो ज्येष्ठायामपवर्जयन्नरः कुरुकुलश्रेष्ठ श्रद्धादमपुरःसरः
ādipatyaṃ vrajenmartyo jyeṣṭhāyāmapavarjayannaraḥ kurukulaśreṣṭha śraddhādamapuraḥsaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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