महाभारत 13.9.17
यं निरीक्षेत संक्रुद्ध आशया पूर्वजातयाप्रदहेत हि तं राजन्कक्षमक्षय्यभुग्यथा
yaṃ nirīkṣeta saṃkruddha āśayā pūrvajātayāpradaheta hi taṃ rājankakṣamakṣayyabhugyathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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