महाभारत 13.9.20एतद्धि परमं तेजो ब्राह्मणस्येह दृश्यतेसहस्रकिरणस्येव सवितुर्धरणीतलेetaddhi paramaṃ tejo brāhmaṇasyeha dṛśyatesahasrakiraṇasyeva saviturdharaṇītaleइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें