महाभारत 13.91.26
उदकानयने चैव स्तोतव्यो वरुणो विभुःततोऽग्निश्चैव सोमश्च आप्याय्याविह तेऽनघ
udakānayane caiva stotavyo varuṇo vibhuḥtato'gniścaiva somaśca āpyāyyāviha te'nagha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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