महाभारत 13.91.2
कानि श्राद्धेषु वर्ज्यानि तथा मूलफलानि चधान्यजातिश्च का वर्ज्या तन्मे ब्रूहि पितामह
kāni śrāddheṣu varjyāni tathā mūlaphalāni cadhānyajātiśca kā varjyā tanme brūhi pitāmaha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें