महाभारत 13.91.33
चमूहरः सुवेषश्च व्योमारिः शंकरो भवःईशः कर्ता कृतिर्दक्षो भुवनो दिव्यकर्मकृत्
camūharaḥ suveṣaśca vyomāriḥ śaṃkaro bhavaḥīśaḥ kartā kṛtirdakṣo bhuvano divyakarmakṛt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें