महाभारत 13.92.16
जलं प्रतरमाणश्च कीर्तयेत पितामहान्नदीमासाद्य कुर्वीत पितॄणां पिण्डतर्पणम्
jalaṃ prataramāṇaśca kīrtayeta pitāmahānnadīmāsādya kurvīta pitṝṇāṃ piṇḍatarpaṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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