महाभारत 13.92.4
अजीर्णेनाभिहन्यन्ते ते देवाः पितृभिः सहसोममेवाभ्यपद्यन्त निवापान्नाभिपीडिताः
ajīrṇenābhihanyante te devāḥ pitṛbhiḥ sahasomamevābhyapadyanta nivāpānnābhipīḍitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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