महाभारत 13.95.12
परिचर्यां वने तां तु क्षुत्प्रतीघातकारिकाम्अन्योन्येन निवेद्याथ प्रातिष्ठन्त सहैव ते
paricaryāṃ vane tāṃ tu kṣutpratīghātakārikāmanyonyena nivedyātha prātiṣṭhanta sahaiva te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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