महाभारत 13.95.17
वृषादर्भिप्रयुक्ता तु कृत्या विकृतदर्शनायातुधानीति विख्याता पद्मिनीं तामरक्षत
vṛṣādarbhiprayuktā tu kṛtyā vikṛtadarśanāyātudhānīti vikhyātā padminīṃ tāmarakṣata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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