महाभारत 13.96.36
अष्टक उवाच · aṣṭaka uvāca
स राजास्त्वकृतप्रज्ञः कामवृत्तिश्च पापकृत्अधर्मेणानुशास्तूर्वीं यस्ते हरति पुष्करम्
sa rājāstvakṛtaprajñaḥ kāmavṛttiśca pāpakṛtadharmeṇānuśāstūrvīṃ yaste harati puṣkaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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