महाभारत 13.97.14
स तामृषिस्ततः क्रुद्धो वाक्यमाह शुभाननाम्रेणुके किं चिरेण त्वमागतेति पुनः पुनः
sa tāmṛṣistataḥ kruddho vākyamāha śubhānanāmreṇuke kiṃ cireṇa tvamāgateti punaḥ punaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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