महाभारत 13.97.2
न केवलं श्राद्धधर्मे पुण्यकेष्वपि दीयतेएतद्विस्तरतो राजञ्श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः
na kevalaṃ śrāddhadharme puṇyakeṣvapi dīyateetadvistarato rājañśrotumicchāmi tattvataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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