महाभारत 13.97.7
तान्क्षिप्तान्रेणुका सर्वांस्तस्येषून्दीप्ततेजसःआनाय्य सा तदा तस्मै प्रादादसकृदच्युत
tānkṣiptānreṇukā sarvāṃstasyeṣūndīptatejasaḥānāyya sā tadā tasmai prādādasakṛdacyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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