महाभारत 13.98.21
सोऽपि लोकानवाप्नोति दैवतैरभिपूजितान्गोलोके स मुदा युक्तो वसति प्रेत्य भारत
so'pi lokānavāpnoti daivatairabhipūjitāngoloke sa mudā yukto vasati pretya bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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