महाभारत 13.98.3
ततः सूर्यो मधुरया वाचा तमिदमब्रवीत्कृताञ्जलिर्विप्ररूपी प्रणम्येदं विशां पते
tataḥ sūryo madhurayā vācā tamidamabravītkṛtāñjalirviprarūpī praṇamyedaṃ viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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