महाभारत 14.11.2तं नृपं दीनमनसं निहतज्ञातिबान्धवम्उपप्लुतमिवादित्यं सधूममिव पावकम्taṃ nṛpaṃ dīnamanasaṃ nihatajñātibāndhavamupaplutamivādityaṃ sadhūmamiva pāvakamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें