महाभारत 14.15.12
विजितेयं धरा कृत्स्ना सव्यसाचिन्परंतपत्वद्बाहुबलमाश्रित्य राज्ञा धर्मसुतेन ह
vijiteyaṃ dharā kṛtsnā savyasācinparaṃtapatvadbāhubalamāśritya rājñā dharmasutena ha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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