महाभारत 14.15.22
उक्तो बहुविधं राजा तत्र तत्र युधिष्ठिरःस ह भीष्मेण यद्युक्तमस्माभिः शोककारिते
ukto bahuvidhaṃ rājā tatra tatra yudhiṣṭhiraḥsa ha bhīṣmeṇa yadyuktamasmābhiḥ śokakārite
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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