महाभारत 14.15.2
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
विजिते पाण्डवेयैस्तु प्रशान्ते च विशां पतेराष्ट्रे बभूवतुर्हृष्टौ वासुदेवधनंजयौ
vijite pāṇḍaveyaistu praśānte ca viśāṃ paterāṣṭre babhūvaturhṛṣṭau vāsudevadhanaṃjayau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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