महाभारत 14.16.33
प्रियैर्विवासो बहुशः संवासश्चाप्रियैः सहधननाशश्च संप्राप्तो लब्ध्वा दुःखेन तद्धनम्
priyairvivāso bahuśaḥ saṃvāsaścāpriyaiḥ sahadhananāśaśca saṃprāpto labdhvā duḥkhena taddhanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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