महाभारत 14.18.24
शरीरमात्मनः कृत्वा सर्वभूतपितामहःत्रैलोक्यमसृजद्ब्रह्मा कृत्स्नं स्थावरजङ्गमम्
śarīramātmanaḥ kṛtvā sarvabhūtapitāmahaḥtrailokyamasṛjadbrahmā kṛtsnaṃ sthāvarajaṅgamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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