महाभारत 14.19.13
विमुक्तः सर्वसंस्कारैस्ततो ब्रह्म सनातनम्परमाप्नोति संशान्तमचलं दिव्यमक्षरम्
vimuktaḥ sarvasaṃskāraistato brahma sanātanamparamāpnoti saṃśāntamacalaṃ divyamakṣaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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