महाभारत 14.19.25
देवानामपि देवत्वं युक्तः कारयते वशीब्रह्म चाव्ययमाप्नोति हित्वा देहमशाश्वतम्
devānāmapi devatvaṃ yuktaḥ kārayate vaśībrahma cāvyayamāpnoti hitvā dehamaśāśvatam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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