महाभारत 14.19.46
स तदुत्सृज्य देहं स्वं धारयन्ब्रह्म केवलम्आत्मानमालोकयति मनसा प्रहसन्निव
sa tadutsṛjya dehaṃ svaṃ dhārayanbrahma kevalamātmānamālokayati manasā prahasanniva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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