महाभारत 14.19.56
एवं हि धर्ममास्थाय येऽपि स्युः पापयोनयःस्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम्
evaṃ hi dharmamāsthāya ye'pi syuḥ pāpayonayaḥstriyo vaiśyāstathā śūdrāste'pi yānti parāṃ gatim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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