महाभारत 14.2.13
कर्मणा येन मुच्येयमस्मात्क्रूरादरिंदमकर्मणस्तद्विधत्स्वेह येन शुध्यति मे मनः
karmaṇā yena mucyeyamasmātkrūrādariṃdamakarmaṇastadvidhatsveha yena śudhyati me manaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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