महाभारत 14.20.5
एवमुक्तः स शान्तात्मा तामुवाच हसन्निवसुभगे नाभ्यसूयामि वाक्यस्यास्य तवानघे
evamuktaḥ sa śāntātmā tāmuvāca hasannivasubhage nābhyasūyāmi vākyasyāsya tavānaghe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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