महाभारत 14.21.10
मन इत्येव भगवांस्तदा प्राह सरस्वतीम्अहं वै कामधुक्तुभ्यमिति तं प्राह वागथ
mana ityeva bhagavāṃstadā prāha sarasvatīmahaṃ vai kāmadhuktubhyamiti taṃ prāha vāgatha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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