महाभारत 14.21.12
यस्तु ते विषयं गच्छेन्मन्त्रो वर्णः स्वरोऽपि वातन्मनो जङ्गमं नाम तस्मादसि गरीयसी
yastu te viṣayaṃ gacchenmantro varṇaḥ svaro'pi vātanmano jaṅgamaṃ nāma tasmādasi garīyasī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें