महाभारत 14.21.18
दिव्यादिव्यप्रभावेन भारती गौः शुचिस्मितेएतयोरन्तरं पश्य सूक्ष्मयोः स्यन्दमानयोः
divyādivyaprabhāvena bhāratī gauḥ śucismiteetayorantaraṃ paśya sūkṣmayoḥ syandamānayoḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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