महाभारत 14.21.19
अनुत्पन्नेषु वाक्येषु चोद्यमाना सिसृक्षयाकिं नु पूर्वं ततो देवी व्याजहार सरस्वती
anutpanneṣu vākyeṣu codyamānā sisṛkṣayākiṃ nu pūrvaṃ tato devī vyājahāra sarasvatī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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