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महाभारत 14.22.5
ब्राह्मण उवाच · brāhmaṇa uvāca
गुणाज्ञानमविज्ञानं गुणिज्ञानमभिज्ञतापरस्परगुणानेते न विजानन्ति कर्हिचित्
guṇājñānamavijñānaṃ guṇijñānamabhijñatāparasparaguṇānete na vijānanti karhicit
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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