महाभारत 14.23.13
अपानः प्रचचाराथ व्यानस्तं पुनरब्रवीत्श्रेष्ठोऽहमस्मि सर्वेषां श्रूयतां येन हेतुना
apānaḥ pracacārātha vyānastaṃ punarabravītśreṣṭho'hamasmi sarveṣāṃ śrūyatāṃ yena hetunā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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