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महाभारत 14.23.1
ब्राह्मण उवाच · brāhmaṇa uvāca
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्सुभगे पञ्चहोतॄणां विधानमिह यादृशम्
atrāpyudāharantīmamitihāsaṃ purātanamsubhage pañcahotṝṇāṃ vidhānamiha yādṛśam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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