महाभारत 14.25.9
अदन्ह्यविद्वानन्नानि ममत्वेनोपपद्यतेआत्मार्थं पाचयन्नित्यं ममत्वेनोपहन्यते
adanhyavidvānannāni mamatvenopapadyateātmārthaṃ pācayannityaṃ mamatvenopahanyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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