महाभारत 14.3.14
स्वयं विनाश्य पृथिवीं यज्ञार्थे द्विजसत्तमकरमाहारयिष्यामि कथं शोकपरायणान्
svayaṃ vināśya pṛthivīṃ yajñārthe dvijasattamakaramāhārayiṣyāmi kathaṃ śokaparāyaṇān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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