महाभारत 14.30.3
स सागरान्तां धनुषा विनिर्जित्य महीमिमाम्कृत्वा सुदुष्करं कर्म मनः सूक्ष्मे समादधे
sa sāgarāntāṃ dhanuṣā vinirjitya mahīmimāmkṛtvā suduṣkaraṃ karma manaḥ sūkṣme samādadhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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