महाभारत 14.30.4
स्थितस्य वृक्षमूलेऽथ तस्य चिन्ता बभूव हउत्सृज्य सुमहद्राज्यं सूक्ष्मं प्रति महामते
sthitasya vṛkṣamūle'tha tasya cintā babhūva hautsṛjya sumahadrājyaṃ sūkṣmaṃ prati mahāmate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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