महाभारत 14.31.2
शोकः क्रोधोऽतिसंरम्भो राजसास्ते गुणाः स्मृताःस्वप्नस्तन्द्री च मोहश्च त्रयस्ते तामसा गुणाः
śokaḥ krodho'tisaṃrambho rājasāste guṇāḥ smṛtāḥsvapnastandrī ca mohaśca trayaste tāmasā guṇāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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