महाभारत 14.38.6
विश्रम्भो ह्रीस्तितिक्षा च त्यागः शौचमतन्द्रिताआनृशंस्यमसंमोहो दया भूतेष्वपैशुनम्
viśrambho hrīstitikṣā ca tyāgaḥ śaucamatandritāānṛśaṃsyamasaṃmoho dayā bhūteṣvapaiśunam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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