महाभारत 14.39.4
संहत्य कुर्वते यात्रां सहिताः संघचारिणःसंघातवृत्तयो ह्येते वर्तन्ते हेत्वहेतुभिः
saṃhatya kurvate yātrāṃ sahitāḥ saṃghacāriṇaḥsaṃghātavṛttayo hyete vartante hetvahetubhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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