महाभारत 14.39.9
सत्त्वं वैकारिकं योनिरिन्द्रियाणां प्रकाशिकान हि सत्त्वात्परो भावः कश्चिदन्यो विधीयते
sattvaṃ vaikārikaṃ yonirindriyāṇāṃ prakāśikāna hi sattvātparo bhāvaḥ kaścidanyo vidhīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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