महाभारत 14.4.26
ततः कुण्डानि पात्रीश्च पिठराण्यासनानि चचक्रुः सुवर्णकर्तारो येषां संख्या न विद्यते
tataḥ kuṇḍāni pātrīśca piṭharāṇyāsanāni cacakruḥ suvarṇakartāro yeṣāṃ saṃkhyā na vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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