महाभारत 14.4.4
तस्य पुत्रशतं राजन्नासीत्परमधार्मिकम्तांस्तु सर्वान्महीपालानिक्ष्वाकुरकरोत्प्रभुः
tasya putraśataṃ rājannāsītparamadhārmikamtāṃstu sarvānmahīpālānikṣvākurakarotprabhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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