महाभारत 14.42.23द्विपादबहुपादानि तिर्यग्गतिमतीनि चजरायुजानि भूतानि वित्त तान्यपि सत्तमाःdvipādabahupādāni tiryaggatimatīni cajarāyujāni bhūtāni vitta tānyapi sattamāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें